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(1) A DARK ANATOMY–by Robin Blake (Pan Macmillan) Rs 400-00 (12) BEHIND THE BEAUTIFUL FOR EVERS–by Katherine Boo (Penguin) Rs 499- (13) THE FLYING MAN–by Roopa Farooki (Hachette) Rs 499-00 (14) DELICACY–by David Foenkinos (HarperCollins) Rs 443-00 (15) THE ART OF HEARING HEART-BEATS–by Jan-Philipp Sendker (Other Press) RS 442-00 (16) THE CHILD INSIDE–by Suzanne Bugler (Pan Macmillan) Rs 325-00 (17) THE THIEF–by Clive Cussler and Justin Scott (Penguin) Rs 150-00 (18) HIDE ME AMONG THE GRAVES–by Tim Powers (Harper Collins) 600-00 (19) THE SONG OF ACHILLES–by Madeline Miller (HarperCollins) 600-00 (20) PASSION WEARS PEARLS–by Renee Bernard (Penguin) Rs 350-00 (21) THE MAHABHARATA–by Shiv Kumar (Harper Collins) Rs 399-00 (22) THE DIALOGUE OF DEVDAS–Tr. Nasreen Munni Kabir (Om Books) 395-00 (23) ESSAYS ON INDIAN ARTISTS–by Geeti Sen (Harper Collins) Rs 999-00 (24) THE ODDS–A LOVE STORY–by Stewart O'Nan (Penguin) Rs 500-00 All these and other latest Books can be purchased on line through To advertise Free and promote your business, advertise FREE on our Websites Send your Advt. and latest information of your Books to :
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ENGLISH BOOKS |








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(1) रवीन्द्रनाथ की कहानियां, दस नारियाँ –स. रामकुमार मुखोपाध्याय (सस्ता साहित्य मंडल) 150- (2) रवीन्द्रनाथ के गीत अनु. प्रयाग शुक्ल (सस्ता साहित्य मंडल) 75-00 (3) सूचना का अधीकार अधिनियम –(सुधाली पुब्लिशेर्स ) 75-00 (4) स्मार्ट रिपोर्टर –शैलेश कुमार व् डॉ ब्रजभूषण (वाणी प्रकाशन) 295-00 (5) आहत देश –अरुंधति राय (राजकमल ) 150-00 (6) इस मुकाम तक –नरेन्द्र नागदेव (हार्पर हिन्दी) 199 (7) डोंट फारगेट योर फ्लोटर्स –के. बी. त्रेहन (पुस्तक महल) 175-00 (8) स्वयं को उद्घाटित करें –पर्वत सिंह (नेचरल ग्रोथ बुक्स) 150-00 (9) ध्यान (अध्यात्म )–खुशदीप बंसल (अंकार फाउन्डेशन ) 295-00 (10) लावा (शायरी ) जावेद अख्तर (राजकमल) 250- (11) खर्च कम करने के तरीके –रिचर्ड टमप्लर (मंजुल पुब्लिशिंग ) 150-00 (12) टीन फिटनेस गाइड –नमिता जैन (डायमंड) 125- (13) चलती चाकी –सूर्य नाथ सिंह (सामयिक प्रकाशन ) 395-00 (14) इस्लाम के धार्मिक आयाम , हुसैनी क्रान्ति के परिप्रेक्ष्य में –जाफर रजा (लोकभारती प्रकाशन) 595 (15) खेल्गुरु –रमेश दवे –(सामयिक प्रकाशन) 495 For more information regarding Books, Authors, Publishers, Please visit Or contact |

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The Annual Fete being inaugurated at Lions Public School, Ashok Vihar, New Delhi
Lions Public School, Ashok Vihar, organized its annual fete recently. The event was inaugurated by Chairman Lion JS Jhaveri. The mood was upbeat in the campus and a number of stalls offering innovative games and activities were put up by the students and teachers. Visitors had a great time. Food stalls were a big draw too. Members of the management and Principal Manju Lamba also participated in the gala celebration. |




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DARSHAN ACADEMY, KIRPAL BAGH, ORGANISED ITS ANNUAL DARSHAN EX STUDENTS' ASSOCIATION (DESA) MEET AT SANTUSHTI, MODEL TOWN-2.
A Mr and Ms DESA contest was organised. Navdeep Singh from 2005 badge and Mohini Kapoor from the 2006 batch were felicitated as Mr DESA and Ms DESA. Later, the traditional cake cutting ceremony was followed by singing and group dance performance. For more, visit : |


















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अंतरराष्ट्रीय बालपुस्तक दिवस 2 अप्रैल 2012 आज के इस महत्वपूर्ण दिन पर हमें कम से कम यह विचार ज़रूर करना होगा कि पुस्तक शब्द का अर्थ कहीं केवल पाठ्य पुस्तकों में ही समाहित हो कर तो नहीं रह गया है? दिन प्रति दिन पुस्तकें और पत्रिकाएं कहीं हमारे जीवन से दूर तो नहीं होती जा रही हैं? आम तौर पर समाज के लिए उपयोगी एवं ज्ञानवर्धक पुस्तकें आज न तो बाज़ार में आसानी से उपलब्ध हैं और न ही इनकी उपलब्धता की सूचना का ही कोई माध्यम बचा है, जिस के सहारे इन् तक पहुँचाने की संभावना बन सके. शराब के ठेके खुलवाने की फ़िक्र प्रशासन को रहती है , लेकिन पुस्तकालय से चूँकि किसी तरह की राजस्व की प्राप्ति कि आशा नहीं की जा सकती अत इस ओर उसका ध्यान जाये भी तो क्यों? समाज के वास्तविक उत्थान के लिए वैसे भी सिर्फ सरकार की ओर ही देखा जाए- यह जायज़ नहीं, बल्कि हमारी ओर सर कुछ ऐसे ठोस प्रयास होने चाहियें जो पुस्तक-पाठक के बीच की खाइ को पाट सकें. कम से कम बच्चों के क्षेत्र में तो यह बहुत ही ज़रूरी है. ऐसे में बच्चों को पुस्तकों के करीब लाने कि जगह ऐसी पुस्तकों को इन् बाल-पाठकों तक पहुंचाने का हमें प्रयत्न करना होगा जो सुंदर और सुग्राह्य होने के साथ-साथ बच्चों में संस्कार, संयम और सुचेतना का संचार कर सकें, इन् में ज्ञान और आत्मविश्वास भर सकें ताकि कम से कम आनेवाले भारत के समाज कि तस्वीर तो पूरी तरह ऐसी हो सके जैसी हम देखना चाहते हैं . अंतर्राष्ट्रीय बाल-पुस्तक दिवस के अवसर पर आइये आज हम यह निश्चय करें कि अपने-अपने स्तर पर इस दिशा में सच्ची भावना के साथ प्रयास शुरू करेंगे और अगली पीढ़ी को संस्कारित एवं सच्चे अर्थों में शिक्षित बनायेंगे. –आइवर यूशिएल लोकप्रिय बालविज्ञान लेखक |